दैनिक शाक्य समाचार
एम पी सिंह गौर
बच्चे के भविष्य को देखते हुए अदालत ने दी राहत; 1 लाख रुपये बैंक में जमा करने का आदेश
प्रयागराज/बदायूं: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नाबालिग भांजी का अपहरण कर उसके साथ मंदिर में विवाह करने और शारीरिक संबंध बनाने के आरोपी मामा (आकाश) की जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। कोर्ट ने यह फैसला मानवीय आधार और नवजात बच्चे के सुरक्षित भविष्य को ध्यान में रखते हुए सुनाया है।
क्या था मामला?
बदायूं जिले के थाना कुंवर गांव अंतर्गत ग्राम ललाई के एक व्यक्ति ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनकी 16 वर्षीय नाबालिग पुत्री का अपहरण कर लिया गया है। पुलिस बरामदगी के बाद मेडिकल परीक्षण में पीड़िता तीन माह की गर्भवती पाई गई। पीड़िता ने बयान दिया कि वह आरोपी आकाश (जो उसका सगा मामा है) के साथ अपनी मर्जी से दिल्ली गई थी, जहाँ दोनों ने मंदिर में विवाह किया और पति-पत्नी की तरह रहने लगे। शैक्षिक प्रमाण पत्रों के आधार पर लड़की की उम्र 15 वर्ष 10 माह पाई गई, जिसके बाद पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत चार्जशीट दाखिल की।
निचली अदालत से खारिज हुई थी अर्जी
मामले की गंभीरता और रिश्तों की मर्यादा को देखते हुए जिला न्यायालय बदायूं ने आरोपी की जमानत अर्जी पहले ही खारिज कर दी थी, जिसके बाद मामला हाई कोर्ट पहुँचा।
हाई कोर्ट में अधिवक्ता की दलीलें
याची के अधिवक्ता एमपी सिंह गौर ने बहस के दौरान तर्क दिया कि पीड़िता अपनी मर्जी से गई थी और अब उसने एक स्वस्थ पुत्र को जन्म दिया है। वर्तमान में पीड़िता अपने माता-पिता के साथ रह रही है। अधिवक्ता ने दलील दी कि याची डेढ़ साल से जेल में है और वह अपने बच्चे व पीड़िता के पालन-पोषण की जिम्मेदारी उठाने को तैयार है। उन्होंने इसे 'नैसर्गिक न्याय' का मामला बताते हुए बच्चे के भविष्य का हवाला दिया।
अदालत का फैसला
जमानत का विरोध करते हुए सरकारी वकील ने कहा कि समाज और कानून इस तरह के विवाह को अमान्य मानता है। हालांकि, सभी पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने आरोपी आकाश की जमानत मंजूर कर ली। कोर्ट ने निर्देश दिया कि जेल से छूटने के छह महीने के भीतर याची को बच्चे के नाम पर किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में 1 लाख रुपये जमा करने होंगे, ताकि बच्चे का भविष्य सुरक्षित रहे।
इस मामले में याची की ओर से अधिवक्ता एमपी सिंह गौर, आर.यू. रिंकी, रेनू और सुनीता सिंह ने प्रभावी पैरवी की।