दैनिक शाक्य समाचार
रिपोर्ट सुनील चौरसिया
लखनऊ, 2 मई 2026।
विश्व अस्थमा दिवस 2026 के उपलक्ष्य में डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ के श्वसन रोग विभाग द्वारा “Advances in Asthma Care” विषय पर Continuing Medical Education कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया।
अस्थमा प्रबंधन की नई गाइडलाइंस पर दिया गया जोर
कार्यक्रम का शुभारंभ श्वसन रोग विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. अजय कुमार वर्मा के स्वागत संबोधन और अस्थमा प्रबंधन की नवीनतम वैश्विक गाइडलाइंस पर व्याख्यान से हुआ। उन्होंने प्रारंभिक पहचान, एंटी-इन्फ्लेमेटरी इनहेलर थेरेपी और साक्ष्य-आधारित उपचार पर बल देते हुए कहा कि इससे अस्थमा से होने वाली जटिलताओं और मृत्यु दर को कम किया जा सकता है।
समय पर पहचान और उपचार से बच सकती है जान
संस्थान के निदेशक एवं मुख्य अतिथि प्रो. डॉ. सी. एम. सिंह ने कहा कि छात्रों, चिकित्सकों और आम जनता में अस्थमा के प्रति जागरूकता बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि समय पर लक्षणों की पहचान और चिकित्सकीय परामर्श से अस्थमा से होने वाली मृत्यु रोकी जा सकती है। उचित उपचार और नियमित फॉलोअप से रोगी सामान्य जीवन जी सकते हैं।
बायोलॉजिक थेरेपी और टीकाकरण पर हुई बात
एसजीपीजीआई के पल्मोनरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. आलोक नाथ ने गंभीर अस्थमा के आधुनिक उपचार पर व्याख्यान देते हुए बायोलॉजिक थेरेपी, एलर्जी इम्यूनोथेरेपी और नई इनहेल्ड उपचार पद्धतियों की भूमिका समझाई। केजीएमयू के प्रो. डॉ. वेद प्रकाश ने अस्थमा व COPD जैसे दीर्घकालिक रोगों में टीकाकरण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि संस्थान में जल्द ही पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन में DM पाठ्यक्रम शुरू होगा।
इनहेलर को लेकर फैले मिथकों पर बात
डॉ. मृदु सिंह ने सांस फूलने के कारणों और सही निदान पर चर्चा की। डॉ. मृत्युंजय सिंह ने अस्थमा से जुड़े मिथकों और मरीजों से सही संवाद की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि इनहेलर सुरक्षित और प्रभावी हैं, इनमें दवा की मात्रा गोलियों से बहुत कम होती है, इसलिए दुष्प्रभाव भी नगण्य हैं।
एआई कार्यशाला रहा विशेष आकर्षण
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण "Artificial Intelligence for Healthcare Professionals" विषय पर हुई कार्यशाला रही, जिसका संचालन बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान के डॉ. निमिष कपूर ने किया।
कार्यक्रम का आयोजन प्रो. डॉ. अजय कुमार वर्मा के नेतृत्व में और डॉ. मृत्युंजय सिंह के संयोजन में हुआ। संचालन डॉ. अमन सक्सेना और डॉ. सागर जैन ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मृत्युंजय सिंह और डॉ. पुलकित गुप्ता ने दिया।