डी.ए.वी. इंटर कॉलेज सभागार में सम्राट प्रेमचंद और प्रसिद्ध नवगीतकार डॉ उमाशंकर तिवारी की जयंती मनायीं गयी
दैनिक शाक्य समाचार
प्रमोद सिन्हा
गाजीपुर "दयानंद एंग्लो वैदिक" डी.ए.वी. इंटर कॉलेज गाजीपुर के सभागार में उपन्यास सम्राट प्रेमचंद और प्रसिद्ध नवगीतकार डॉ उमाशंकर तिवारी की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर आधार - वक्तव्य देते हुए विद्यालय के शिक्षक डॉक्टर संतोष कुमार तिवारी ने कहा कि प्रेमचंद को उपन्यास -सम्राट कहा जाता है। उन्होंने सेवासदन, निर्मला ,रंगभूमि कर्मभूमि ,प्रेमाश्रम ,गोदान ,गबन, मंगलसूत्र जैसे कालजई उपन्यास लिखे। जिसमें जनता की आम आदमी की मूल समस्याओं का वर्णन किया गया। प्रेमचंद आदर्शोन्मुख यथार्थवादी उपन्यासकार थे ।उन्होंने लगभग 300 कहानी लिखे, जो मानसरोवर के आठ भागों में संकलित हैं ।प्रेमचंद साहित्य को मैस्क्युलिन चाहते थे। उनका साहित्य दलित प्रश्न ,स्त्री प्रश्न, मजदूरों की समस्या पर केंद्रित है ।डॉ उमाशंकर तिवारी एक श्रेष्ठ नवगीतकार थे ।उन्होंने' जलते शहर में'' धूप कड़ी है' तोहफे कांच घर के' और 'असहमत समय' नाम से चार नवगीत संकलन लिखे। उन्होंने नवगीत -दशक चार का संपादन भी किया। गीत- काव्य पर उनका शोध प्रबंध है। उनकी कविताएं काशी हिंदू विश्वविद्यालय ,पूर्वांचल विश्वविद्यालय आदि कई विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जाती हैं।
इस अवसर पर अपना विचार रखते हुए विद्यालय के अंग्रेजी के प्रवक्ता आशुतोष कुमार मिश्रा ने कहा कि साहित्य और 'कला जीवन के लिए' और 'कला कला के लिए 'दो माध्यमों से लिखा जाता है ।जिन साहित्यकारों में इनका संतुलन स्थापित होता है वह श्रेष्ठ साहित्य का सृजन करते हैं ।नई कविता की गद्यात्मकता के विरुद्ध नवगीत गेयता छांदसिकता और लयता से परिपूर्ण है। इस अवसर पर अपने विचार रखते हुए विद्यालय के प्रवक्ता प्रांशु कुमार उपाध्याय ने कहा की जो साहित्य मनुष्य। केंद्रित होता है वही टिकता है पाश्चात्य सभ्यता ,संस्कृति और साहित्य के प्रभाव में कविता से गद्य को की ओर जो यात्रा शुरू हुई थी, उसने कविता को नीरस बना दिया था, नवगीत उसे कमी को पूरा करता है ।नवगीत बिंबों का काव्य होता है ।इस अवसर पर बोलते हुए अंग्रेजी के शिक्षक जितेंद्र कुमार ने कहा की जो अपने समय को अतिक्रमित करता है उन्हीं की जयंतियां मनाई जाती हैं। विद्यालय के वरिष्ठ लिपिक श्री संजय कुमार मिश्रा ने कहा कि साहित्यकार को सच कहने का साहस होना चाहिए नहीं तो वह चारण कहा जाता है। हिंदी के प्रवक्ता शैलेश कुमार ओझा ने प्रेमचंद को श्रेष्ठ कहानीकार बताया और उनकी कहानी ईदगाह ,मंत्र और पूस की रात को कालजई रचनाएं बताया। विद्यालय के प्रधानाचार्य हरिशंकर ने कहा कि बदलते समय मे समाज में नवता का विचार ही टिकता है ।जो पुराना जीर्ण -शीर्णहो गया है उसको छोड़कर ही आगे बढ़ा जा सकता है ,नवगीत उस कमी को पूरा करता है ।
इस कार्यक्रम के अध्यक्ष विद्यालय के प्रबंधक आदित्य प्रकाश ने कहा आज हमारे विद्यालय में मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती पर आप सभी ने बेहद प्रभावशाली विचार रखे। कई वक्ताओं ने प्रेमचंद जी के साहित्य पर गहरा प्रकाश डाला है। मैं उन सभी का आभार व्यक्त करता हूँ। साथियों, इतिहास गवाह है कि विचारों की यह क्रांति कभी थमती नहीं है। जिस प्रकार महर्षि दयानंद सरस्वती के सामाजिक सुधारों, पाखंड-विरोध और 'वेदों की ओर लौटें' के नारे ने मुंशी प्रेमचंद जी के जीवन और लेखन को गहराई से प्रभावित किया था, ठीक उसी प्रकार प्रेमचंद के प्रगतिशील विचारों का प्रभाव आज हम सभी के जीवन पर पड़ना चाहिए।महापुरुषों का जीवन केवल किताबों में सजाने के लिए नहीं, बल्कि अपने आचरण में उतारने के लिए होता है। उनका जीवन हमारे लिए एक जलती हुई मशाल और सर्वोच्च प्रेरणा है। यदि आज हम इन महान आत्माओं के संघर्षों, उनके सिद्धांतों और उनके विचारों से प्रेरणा नहीं लेते हैं, तो हमारा यह मानव जीवन पूरी तरह से नीरस, संवेदनहीन और अर्थहीन हो जाएगा।इसलिए आइए, दयानंद सरस्वती के राष्ट्रवाद और प्रेमचंद की सामाजिक संवेदना को अपने भीतर आत्मसात करें। अपनी शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण का माध्यम बनाएं। यही हमारे समय की सबसे बड़ी सार्थकता होगी