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प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से बदली गरीब परिवारों की रसोई, स्वास्थ्य और सम्मान को मिला नया आयाम।

शनिवार, 25 अप्रैल 2026, अप्रैल 25, 2026 WIB Last Updated 2026-04-25T10:38:49Z
दैनिक शाक्य समाचार 
अभयराज सिंह 
बदायूंः - महिलाओं के स्वास्थ्य एवं सुगमता के दृष्टिगत तथा धुंआ मुक्त ईधन उपलब्ध कराने के उददेश्य से मा0 प्रधानमंत्री द्वारा उज्जवला योजना का शुभारम्भ 01 मई 2016 को किया गया था। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने जनपद बदायूं में गरीब एवं वंचित परिवारों के जीवन में व्यापक बदलाव लाया है। इस योजना के माध्यम से महिलाओं को धुएं से मुक्ति दिलाकर उन्हें स्वच्छ, सुरक्षित एवं सम्मानजनक जीवन प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जनपद बदायूँ में कुल 427386 लाभार्थियों को उज्ज्वला योजना के अंतर्गत निशुल्क गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं।
उज्जवला योजना के अन्तर्गत एक कनेक्शन का मूल्य 3962 रू० होता है जिसमें 2200 रु० भारत सरकार द्वारा वहन किया जाता है तथा शेप 1762 रू0 (गैस चूल्हा एवं रिफिल का मूल्य) उपभोक्ताओं की सब्सिडी में से लोन के माध्यम से समायोजित किया जाता है। इस प्रकार लाभार्थी को निःशुल्क कनेक्शन उपलब्ध हो जाता है। रिफिल वितरण का निर्धारित समयः राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियो को 02 निःशुल्क एल०पी०जी० सिलेण्डर रिफिल प्रदान किए जाने का निर्णय लिया गया है।
पीएमयूवाई कनेक्शन के तहत कनेक्शन प्राप्त करने के लिए आवेदक की आयु 18 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए। उसी परिवार में किसी अन्य तेल विपणन कंपनी (ओएमसी) का कोई अन्य एलपीजी कनेक्शन नहीं होना चाहिए। योजना अन्तर्गत बी0पी0एल0, अन्त्योदय अन्न योजना, एसईसी 2011 डाटा, प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना, एस0सी0, एस0टी0 अति पिछडा वर्ग के परिवारों, चाय बागान, जंगलों में रहने वाले परिवारों तथा आईलेण्ड में रहने वाले परिवारों को निःशुल्क गैस कनेक्शन उपलब्ध कराया जाता है।
उज्जवला योजना के कनेक्शनधारक द्वारा उज्जवला योजना के अन्तर्गत सिलेण्डर रिफिल बुक करने पर डिलीवरी के समय सिलेण्डर रिफिल के मूल्य का भुगतान किया जाता है। गैस कम्पनी द्वारा लाभार्थी के आधार बेस्ड खाते में सिलेण्डर डिलीवरी के 02 से 03 दिवस के भीतर निर्धारित अनुमन्य सब्सिडी अंतरित कर दी जाती हैं।
यह पहल विशेष रूप से उन परिवारों के लिए वरदान साबित हुई है, जो पहले लकड़ी, उपले या कोयले जैसे पारंपरिक ईंधनों पर निर्भर थे। इन पारंपरिक साधनों से निकलने वाला धुआं महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक होता था, जिससे आंखों एवं फेफड़ों से संबंधित गंभीर बीमारियां उत्पन्न होती थीं।
योजना के क्रियान्वयन के पश्चात अब बड़ी संख्या में महिलाओं को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध हुआ है, जिससे उनके स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ समय की भी बचत हो रही है। पहले जहां महिलाओं को घंटों लकड़ी इकट्ठा करने में समय व्यतीत करना पड़ता था, वहीं अब वे इस समय का उपयोग अन्य घरेलू कार्यों, बच्चों की देखभाल अथवा स्वरोजगार गतिविधियों में कर पा रही हैं।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने महिलाओं के सशक्तिकरण को भी बढ़ावा दिया है। रसोई में स्वच्छता आने से उनका जीवन स्तर बेहतर हुआ है और उन्हें सामाजिक सम्मान भी प्राप्त हुआ है। इसके अतिरिक्त, पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी यह योजना अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुई है, क्योंकि इससे वनों पर निर्भरता कम हुई है और प्रदूषण में कमी आई है।
जिला प्रशासन द्वारा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। पात्र लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें शीघ्रता से लाभान्वित किया जा रहा है तथा जागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को स्वच्छ ईंधन के उपयोग के प्रति प्रेरित किया जा रहा है।
जनपद के लाभार्थियों ने भी इस योजना के प्रति संतोष व्यक्त किया है और इसे अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बताया है। उज्ज्वला योजना ने न केवल रसोई को धुएं से मुक्त किया है, बल्कि महिलाओं के जीवन में स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान का नया अध्याय भी जोड़ा है।
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