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खेत की उर्वरकता हेतु जैव उर्वरकों व हरी खाद का उपयोग आवश्यक

बुधवार, 24 जून 2026, जून 24, 2026 WIB Last Updated 2026-06-24T12:42:18Z
खेत की उर्वरकता हेतु जैव उर्वरकों व हरी खाद का उपयोग आवश्यक 


दैनिक शाक्य समाचार 
प्रमोद सिन्हा 

गाजीपुर। 'खेत बचाओ अभियान' के तहत विकास खण्ड मनिहारी के मधुबन गांव में किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग का संदेश दिया गया।
       भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर) वाराणसी के निदेशक डॉ. राजेश कुमार के नेतृत्व में नोडल अधिकारी डॉ. नीरज सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में लगभग 65 किसानों ने भाग लिया।
         कार्यक्रम में वैज्ञानिक दल के टीम लीडर डॉ. विकास सिंह ने किसानों को मृदा परीक्षण आधारित संतुलित उर्वरक उपयोग का महत्व बताते हुए कहा कि यूरिया, डीएपी एवं पोटाश का असंतुलित प्रयोग मिट्टी की उर्वरता, फसल उत्पादकता तथा किसानों की आय पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। उन्होंने किसानों से मृदा स्वास्थ्य कार्ड की अनुशंसाओं के अनुसार उर्वरकों का प्रयोग करने तथा जैव उर्वरकों, हरी खाद एवं फसल चक्र अपनाने का आग्रह किया।
           वैज्ञानिक डॉ. कुलदीप श्रीवास्तव ने मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के लिए जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट, कम्पोस्ट एवं हरी खाद के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इनके उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता, जलधारण क्षमता एवं लाभकारी सूक्ष्मजीवों की सक्रियता बढ़ती है। उन्होंने समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन की वैज्ञानिक तकनीकों की भी जानकारी दी।
      वैज्ञानिक राजीव कुमार ने किसानों को समेकित पोषक तत्व प्रबंधन, आधुनिक कृषि तकनीकों, जल संरक्षण उपायों तथा विभिन्न किसान हितैषी सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की कृषि संबंधी समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान किया गया तथा उन्हें टिकाऊ एवं लाभकारी खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। किसानों ने मृदा परीक्षण आधारित संतुलित उर्वरक उपयोग एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संकल्प लेते हुए 'खेत बचाओ अभियान' की सराहना की।
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