सौहार्द साथी अच्छे लाल सिंह कुशवाहा के संचालन में लोकतंत्र पर हुआ संवाद, जागरूक नागरिकों की भूमिका पर जोर
संविधान चेतना केंद्र बिन्दवलिया में लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों पर हुई व्यापक चर्चा
दैनिक शाक्य समाचार
प्रमोद सिन्हा
गाजीपुर। सौहार्द बन्धुत्व मंच गाजीपुर के तत्वावधान में शुक्रवार की शाम बिन्दवलिया स्थित संविधान चेतना केंद्र एवं समुदाय में "लोकतंत्र पर संवाद" कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन सौहार्द साथी अच्छे लाल सिंह कुशवाहा ने किया। संवाद के दौरान वक्ताओं ने लोकतंत्र, संविधान, नागरिक अधिकारों तथा वर्तमान लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अंकित पाण्डेय ने कहा कि भारत का लोकतंत्र विश्व की सबसे सुंदर और समावेशी शासन प्रणालियों में से एक है, जिसमें सत्ता की वास्तविक शक्ति जनता के हाथों में निहित होती है। उन्होंने कहा कि नागरिक मतदान के माध्यम से अपने प्रतिनिधियों का चयन करते हैं, जो संसद और विधानसभाओं में बैठकर कानून निर्माण करते हैं तथा जनकल्याणकारी योजनाओं को लागू करते हैं। लोकतंत्र में प्रत्येक वयस्क नागरिक को मतदान का अधिकार प्राप्त है तथा निष्पक्ष और नियमित चुनाव लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला हैं।
वक्ता कुतुबद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि भारतीय संविधान और कानून सर्वोपरि हैं तथा कोई भी व्यक्ति या पद संविधान से ऊपर नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता, धार्मिक स्वतंत्रता सहित 6 मौलिक अधिकार प्रदान करता है, जिनकी रक्षा करना राज्य का दायित्व है।
दलित समुदाय के प्रतिनिधि मुकेश राम ने लोकतंत्र के तीन प्रमुख स्तंभों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका लोकतांत्रिक व्यवस्था की रीढ़ हैं। उन्होंने बताया कि विधायिका कानून बनाती है, कार्यपालिका उन कानूनों को लागू करती है और न्यायपालिका कानून की रक्षा करते हुए विवादों का निष्पक्ष समाधान करती है। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट जैसी संस्थाएं लोकतंत्र की मजबूती का महत्वपूर्ण आधार हैं।
कार्यक्रम में वरिष्ठ मेंटर काजी फरीद आलम ने लोकतंत्र और संविधान पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने जिस लोकतंत्र की परिकल्पना की थी, उसे मजबूत बनाने की जिम्मेदारी प्रत्येक नागरिक की है। उन्होंने वर्तमान लोकतांत्रिक परिस्थितियों, नागरिक अधिकारों तथा संवैधानिक मूल्यों के संरक्षण की आवश्यकता पर गंभीर चर्चा की। उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया पारदर्शी और न्यायपूर्ण होनी चाहिए ताकि किसी भी पात्र नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित न हों।
शील वचन ने कहा कि संविधान द्वारा नागरिकों को छह मौलिक अधिकार प्रदान किए गए हैं, जिनका उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान और स्वतंत्रता के साथ जीवन जीने का अवसर देना है। उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए नागरिक जागरूकता और सहभागिता को आवश्यक बताया।
संवाद कार्यक्रम में लोकतंत्र की चुनौतियों, संवैधानिक अधिकारों, चुनाव प्रक्रिया तथा नागरिक कर्तव्यों पर खुलकर चर्चा हुई। उपस्थित लोगों ने लोकतंत्र को मजबूत बनाने तथा संविधान के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
इस अवसर पर अंकित पाण्डेय, राहुल कुशवाहा, सिद्धार्थ, गंगासागर कुशवाहा,महेन्द राम, कैलाश कुशवाहा, कुतुबद्दीन सिद्दीकी, कुबेर कुशवाहा, काजी फरीद आलम सहित बड़ी संख्या में समुदाय के लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का आयोजन सौहार्द बन्धुत्व मंच गाजीपुर द्वारा किया गया तथा संचालन सौहार्द साथी अच्छे लाल सिंह कुशवाहा ने किया।