लूट के मामले की समस्त कार्यवाही हाईकोर्ट ने की अपास्त।
दैनिक शाक्य समाचार
एम.पी. सिंह गौर
प्रयागराज/बदायूं ग्राम सिचौली थाना बिसौली जिला बदायूं के धीरेंद्र ने विशेष न्यायाधीश (डकैती), बदायूं के न्यायालय में परिवाद दाखिल करते हुए गांव के सुखबीर, उदयवीर, विजय सिंह व मनोज पर आरोप लगाया कि दिनांक 14.03.2022 समय 4:00 बजे शाम को अपने-अपने हाथ में लाठी डंडा व तमंचे से लैस होकर जबरदस्ती मेरे घर में घुस आए और गाली गलौज कर मारपीट की और चाचा वीरपाल से ₹300 लूट लिए तथा मोटरसाइकिल डंडा मारकर तोड़ दी। मुझे व विकेश को बहुत बेरहमी से मारपीट कर घायल कर दिया। मेडिकल मुआयना व इलाज पुलिस ने करवाया था और मनोज ने मुझे जान से मारने की नीयत से फायर मारा मैं बाल—बाल बच गया और फायर दीवार में लगा। मौके पर काफी लोग आ गए जिन्होंने ललकारा तो चारों अभियुक्त भाग गए। न्यायालय ने धीरेंद्र व घायल विकेश आदि गवाहन का बयान दर्ज कर सुखबीर, उदयवीर, विजय सिंह व मनोज को प्रथम दृष्टया दोषी पाते हुए धारा 392 व 427 भारतीय दंड संहिता के तहत तलब किया। घटना के चार साल बाद दोनों पक्षों में समझौता हो गया और समझौता नाम दोनों पक्षों ने लिखकर विशेष न्यायाधीश (डकैती), बदायूं के न्यायालय में दाखिल किया जिसे न्यायालय ने गैर शमनीय अपराध होने के आधार पर समझौतानामा दिनांक 17.02.2025 को खारिज कर दिया। याचीगण ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद में समझौतानामा के आधार पर याचिका अपने अधिवक्ता एमपी सिंह गौर के माध्यम से दाखिल की। बहस के दौरान बताया कि दोनों पक्ष एक ही गांव व एक ही समाज के आपस में पड़ोसी हैं। आपसी जमीन जायदाद का विवाद गांव में चलता रहता है। इसी कारण से झूठ फसाया गया है। अब सभी विवाद गांव वालों ने समझौता के आधार पर समाप्त करा दिए हैं। बहस के दौरान बताया कि ऐसे अपराध जो विशेष गंभीर प्रकृति के ही न हो, चाहे गैर शमनीय ही क्यों न हो, सर्वोच्च न्यायालय ने अवधारित किया है ऐसे अपराधों को समझौता के आधार पर समाप्त किया जा सकता है। याचीगण के अधिवक्ता द्वारा दलील एवं कई नजरें पेश की गयी। उच्च न्यायालय ने लूट के इस मामले कि समस्त कार्यवाही अपास्त कर दी और सुखबीर, उदयवीर, विजय सिंह व मनोज को समझौता के आधार पर बरी कर दिया याचीगण की ओर से अधिवक्ता एमपी सिंह गौर व जूनियर अमित कुमार शुक्ला ने पैरवी की।