बदायूं
बदायूं -नौकरी से समाजसेवा, जिला अध्यक्ष से राष्ट्रीय अध्यक्ष तक का सफर, कम समय में किसानों के बीच बनाई बड़ी पहचान। जानिए भारतीय किसान यूनियन हल के राष्ट्रीय अध्यक्ष अतुल तोमर की कहानी।
आज हम आपको एक ऐसे शख्स की कहानी सुनाते हैं, जो न विधायक है, न सांसद और न ही उसका कोई राजनीतिक बैकग्राउंड है। इसके बावजूद उसने अपने दम पर भू-माफियाओं और अपराधियों के खिलाफ आवाज उठाकर अपनी एक अलग पहचान बनाई। नौकरी से लेकर जिला अध्यक्ष और फिर राष्ट्रीय अध्यक्ष तक का सफर बहुत कम समय में तय करने वाले इस शख्स का नाम है अतुल तोमर।
बात कर रहे हैं भारतीय किसान यूनियन (हल) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अतुल तोमर की, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बदायूं जनपद के एक छोटे से गांव हसूपुर बहेड़िया के जमींदार किसान परिवार से आते हैं। उनके पिता स्वर्गीय सुनील तोमर भी एक किसान थे।
इंटरनेशनल कंपनियों में दी सेवाएं, फिर समाजसेवा की ओर बढ़े कदम
जानकारी के अनुसार, अतुल तोमर ने कई इंटरनेशनल कंपनियों में फायर सर्विस के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दीं। लेकिन नौकरी के दौरान भी उनका रुझान समाजसेवा और राजनीति की तरफ बढ़ता रहा। वह अपनी सर्विस के बीच भी समाजसेवा में सक्रिय रहे।
जब उन्हें महसूस हुआ कि नौकरी में रहते हुए वह समाजसेवा के लिए पर्याप्त समय नहीं निकाल पा रहे हैं, तो उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया और व्यापार की तरफ कदम बढ़ाए। इसके बाद वह अपने गांव हसूपुर बहेड़िया लौट आए और गरीब किसान-मजदूरों की मदद करने का निर्णय लिया।
6 अप्रैल 2025 को मिला जिला अध्यक्ष का दायित्व
उनके सामाजिक कार्यों और सक्रियता को देखते हुए 6 अप्रैल 2025 को भारतीय किसान यूनियन भानू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भानू प्रताप सिंह जी ने उन्हें बदायूं का जिला अध्यक्ष बनाया।
जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद अतुल तोमर ने जनपद के पीड़ित किसानों की समस्याओं को उठाना और उन्हें न्याय दिलाने के लिए संघर्ष करना शुरू किया। धीरे-धीरे बहुत कम समय में बदायूं में उनके साथ एक बड़ा कारवां जुड़ने लगा।
अतुल तोमर ने सच्चाई की लड़ाई लड़ने का रास्ता चुना। उन्होंने कभी इस बात की परवाह नहीं की कि सामने वाला रुपये से मजबूत है या राजनीति में उसकी कितनी पकड़ है। उन्होंने हमेशा गरीब और पीड़ित लोगों का साथ देने की बात कही।
धीरे-धीरे गरीब किसानों और मजदूरों के बीच उनकी पहचान बनने लगी। कई विशाल किसान महापंचायतों का आयोजन किया गया, जिनकी चर्चा राजनीतिक गलियारों तक पहुंचने लगी।
अतुल तोमर हमेशा अपने अलग अंदाज और कार्यशैली को लेकर भी चर्चाओं में बने रहे।
7 जुलाई 2026 को भानू गुट से दिया इस्तीफा, समर्थकों में छाई निराशा
फिर कहानी में एक नया मोड़ आया। कुछ मतभेदों के चलते 7 जुलाई 2026 को अतुल तोमर ने भारतीय किसान यूनियन भानू के जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।
हालांकि उस समय उन्होंने मीडिया के सामने इस्तीफे का कारण स्पष्ट नहीं किया था। उनके इस्तीफे की खबर से बदायूं में उनके समर्थकों के बीच निराशा फैल गई।
बताया जाता है कि अतुल तोमर के इस्तीफे के साथ ही उनके साथ जुड़े कई पदाधिकारियों ने भी भानू गुट छोड़ दिया।
इस सफर में अनिल ठाकुर और विकेश सिंह को उनके बेहद भरोसेमंद और करीबी साथियों के रूप में माना जाता है। बताया जाता है कि संगठन की कई महत्वपूर्ण योजनाएं और रणनीतियां ये तीनों मिलकर तैयार करते हैं। दोनों पदाधिकारी अतुल तोमर के साथ साये की तरह खड़े रहे।
12 जुलाई 2026 को हुई भारतीय किसान यूनियन हल की आधिकारिक घोषणा
फिर कहानी में वह मोड़ आया, जिसने अतुल तोमर के सफर को एक नया नाम और नई पहचान दी।
12 जुलाई 2026 को अतुल तोमर ने भारतीय किसान यूनियन (हल) की आधिकारिक घोषणा की। इसके बाद बदायूं के समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई।
एक जिला अध्यक्ष से राष्ट्रीय अध्यक्ष तक का सफर तय करते हुए अतुल तोमर ने अपने नए संगठन के माध्यम से किसानों और मजदूरों की आवाज उठाने का संकल्प लिया।
बदायूं के किसानों और समर्थकों ने इसे अपने जनपद के लिए गर्व की बात बताया। उनका कहना था कि बदायूं से एक किसान संगठन की शुरुआत हुई है, जिसकी आवाज अब केवल बदायूं ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में सुनाई दे रही है।
आज कई गाड़ियों का काफिला, किसानों के बीच अलग पहचान
आज अतुल तोमर के साथ कई गाड़ियों का काफिला चलता है। उनके साथ बड़ी संख्या में पदाधिकारी और समर्थक दिखाई देते हैं। एक छोटे से गांव के किसान परिवार से निकलकर राष्ट्रीय अध्यक्ष तक पहुंचने का उनका सफर क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
एक ऐसा शख्स, जिसके पीछे न कोई राजनीतिक विरासत थी, न कोई विधायक और सांसद का सहारा। जिसने नौकरी से शुरुआत की, समाजसेवा की राह चुनी, जिला अध्यक्ष बना और फिर अपना किसान संगठन खड़ा कर राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली।
यह कहानी है भारतीय किसान यूनियन (हल) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अतुल तोमर की।
कैसी लगी आपको अतुल तोमर की यह कहानी? अपनी प्रतिक्रिया हमें जरूर दें।

